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  2016-05-09

कर्मचारियों की कटौती करने की तैयारी में भारतीय सेना, आखिर क्यों? पढ़ें पूरी खबर.....

नई दिल्ली। भारतीय सेना गैर लड़ाकू अनुभाग में कर्मचारियों की संख्या कम करने की तैयारी कर रही है। सेना चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने इस पर एक टीम बनाकर स्टडी करने के लिए आदेश दिए हैं। एक समाचार पत्र की खबर के अनुसार, इस फैसले की वजह खर्च कम करना और सेना को सही आकार में लाना है। आर्मी चीफ ने अपने एक सीनियर मोस्ट जनरल को इस पर अगस्त तक अपनी सिफारिशें देने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि स्टाफ कम करने का रोडमैप अगले तीन महीनों में तैयार कर लिया जाएगा। जनरल सुहाग का यह आदेश पीएम मोदी के उस बयान के पांच महीने बाद आया है, जब उन्होंने कहा था कि आधुनिकीकरण और सेना को एक साथ बढ़ाना मुश्किल काम है और गैर जरूरी लक्ष्य है। रिटायर्ड जनरल फिलिप कैम्पोस का कहना है कि कॉम्बेट और नॉन कॉम्बेट स्टाफ के अनुपात को समझना और सेट करना आसान काम नहीं है। भारतीय सेना में फिलहाल 10.2 लाख कर्मचारी हैं। सेना में 49,631 ऑफिसर होने चाहिए, लेकिन 9,106 अधिकारी कम हैं। जनरल कम्पोस ने कहा सेना की एक डिवीजन में 14,000 जवान होते हैं और उन्हें सपोर्ट देने के लिए 3,000 लॉजिस्टिक स्टाफ रहता है। स्टडी में इस बात पर फोकस होगा कि लॉजिस्टिक सपोर्ट को कम करके भी उसका बेहतर इस्तेमाल कॉम्बेट फोर्स के लिए कैसे किया जा सकता है। भारतीय सेना दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्मी है। 2005 से 2013 के बीच आर्मी में 14,000 नौकरियां पहले ही कम की जा चुकी हैं। सरकार ने फरवरी में संसद को बताया था कि भारत डिफेंस पर 2.58 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगा। 2016-17 के लिए किए गए इस अलॉटमेंट में पिछले साल की तुलना में 9.7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। रक्षा मंत्री भी कर चुके हैं कटौती का इशारा इसी साल मार्च में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आर्मी के मैनपावर में कटौती की तरफ इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि सिक्युरिटी फोर्सेस में एक्स्ट्रा रिसोर्सेस घटाने की जरूरत है। रक्षा मंत्री का यह बयान इसलिए मायने रखता है, क्योंकि इस साल डिफेंस पर्सनल्स की सैलरी पर 95 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

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