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Pooja Sharma   2018-09-15

ऑनलाइन सामान खरीदना होगा महंगा, 1 अक्टूबर से आपको देना होगा इतना टैक्स

OnlineIndia डेस्क l अगले महीने से ऑनलाइन सामान खरीदना महंगा होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा टैक्स बढ़ाने से अब इसकी मार सबसे ज्यादा ग्राहकों पर पड़ने वाली है। इससे फेस्टिव सीजन में ग्राहकों को सामान खरीदने पर ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा।

देना होगा टीसीएस/टीडीएस

1 अक्टूबर 2018 से सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) और टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) देना होगा। केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) अधिनियम के मुताबिक, अधिसूचित कंपनियों को 2.5 लाख रुपये से अधिक की वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के भुगतान पर एक फीसदी टीडीएस काटना जरूरी होगा। साथ ही, राज्य कानूनों के तहत राज्य एक फीसदी टीडीएस वसूलेंगे।

जुलाई 2017 से लागू हुआ था जीएसटी

पूरे देश में 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था, लेकिन कारोबारियों को तैयारी का समय देने के लिए टीडीएस और टीसीएस के प्रावधान 30 सितंबर 2018 तक टाल दिया गया था। 18 सितंबर से टीडीएस और टीसीएस के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किए जाएंगे। कंपनियों के पास नियम के पालन की तैयारी करने के लिए बहुत कम समय रह गया है। उन्हें 2 हफ्ते में अपना सिस्टम बदलना पड़ेगा। इस प्रावधान से ना सिर्फ अप्रत्यक्ष कर बल्कि प्रत्यक्ष कर की चोरी भी रुकेगी। टीसीएस से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वालों की कमाई का अंदाजा लग सकेगा।

जीएसटी संग्रह बढ़ाने के लिए उठाया कदम

मौजूदा वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन हुआ था। अगस्त में सिर्फ 93,960 करोड़ आए, जो 2018-19 में सबसे कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के लिए ही सरकार ने जल्दबाजी में यह फैसला लिया है।

क्या होता है टीडीएस
टीडीएस शुरू करने का मकसद था स्रोत पर ही टैक्स काट लेना. अगर किसी व्यक्ति को कोई आय होती है तो उस आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाये तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं. सरकार टीडीएस के जरिये टैक्स जुटाती है. टीडीएस विभिन्न तरह के आय़ स्रोतों पर काटा जाता है मसलन सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि पर. टीडीएस हर आय पर और हर किसी लेन-देन पर लागू नहीं होता है. आयकर विभाग की ओर से कई तरह के अलग-अलग पेमेंट्स पर अलग-अलग रेट्स सुझाव गए हैंl

जानें क्या होता है टीसीएस
टीसीएस यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स. जिसमें विक्रेता खरीदार से टैक्स वसूलता है. सरकार हर तरह के ट्रांजेक्शन पर नजर रखना चाहती है. बड़े खर्च और कम टैक्स भुगतान के मामले पकड़े जाएगें. अगर 10 लाख रुपये से ज्यादा की मोटर कार की आप खरीदारी करते है तो उसपर 1 फीसदी टीसीएस कांटा जाएगा. साथ ही, चेक से भुगतान करने पर भी टीसीएस लगाया जायेगा. ज्यादा खरीदारी करने पर टीसीएस तभी जब नकद भुगतान 2 लाख से ज्यादा होगा. इसके जरिये 2 लाख नगद खरीदारी पर 1 फीसदी टीसीएस कांटा जाएंगा. टीडीएस की तरह टीसीएस का भी क्रेडिट मिलेगा. फॉर्म 26 एएस में टीसीएस का रिकॉर्ड देख सकते हैl

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