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Pooja Sharma   2018-08-16

रतनपुर रामटेकरी: गाय अपने दूध से करती थी इस स्वयंभू शिवलिंग का अभिषेक

OnlineIndia बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर रतनपुर रामटेकरी के नीचे बूढ़ा महादेव (वृद्धेश्वर महादेव) विराजमान हैं। प्राचीनकाल से बूढ़ा महादेव वृद्धेश्वरनाथ के नाम से शिव आस्था का केंद्र बना हुआ है। बूढ़ा महादेव के रूप में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू हैं। यहां सावन के महीने में विशेष रूप से पूजन होता है।
इस मंदिर को लेकर अनेक लोककथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि रतनपुर के राजा वृद्धसेन ने वर्षों पहले मंदिर का निर्माण कराया था। इसके बाद राजा रत्नदेव ने 1050ई. में मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। काफी प्राचीन मंदिर होने की वजह से इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।
मंदिर के पास स्थित कुंड भी भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। कुंड के पवित्र जल से भक्त महादेव का अभिषेक करते हैं। राजा वृद्धसेन के पास बहुत सारी गायें थीं। उन्हें चरवाहा जंगल चराने ले जाया करते थे। जंगल में गायों का एक झुंड अलग होकर बांस की घनी झाड़ियों में जाकर शिवजी का दूध से अभिषेक करती थीं। चरवाहे ने जानकारी राजा को दी।
राजा भी इसकी पुष्टि कर आश्चर्यचकित रह गए। उसी रात भगवान ने राजा को स्वप्न देकर इस बात का प्रमाण दिया। इसके साथ ही मंदिर के निर्माण का भी आदेश दिया। राजा ने भगवान से मिले आदेश के अनुसार ही मंदिर का निर्माण करवाया। वैसे तो रतनपुर में मां महामाया मंदिर के समीप होने के कारण यहां बारहों महीने श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। सावन में यहां एक महीने कांवरियों का मेला लगा रहता है।

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