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Roshan Bharti   2018-01-07

सफल हुआ शोध, अब छत्तीसगढ़ में भी होगा स्ट्राबेरी का उत्पादन

OnlineIndia रायपुर। कृषि के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता छत्तीसगढ़ के हाथ लगी है ।इंदिरा गांधी कृषि विवि ने सेहत और स्वाद के लिए उत्तम माने जाने वाले स्ट्रॉबेरी की 14 किस्मों पर दो साल के अनुसंधान के बाद बड़ी कामयाबी पाई है। राजधानी से 80 किमी दूर स्थित पंडित किशोरी लाल शुक्ला कॉलेज ऑफ हार्टीकल्चर एंड रिसर्च केंद्र राजनांदगांव में इस पर रिसर्च चल रहा है। जिसमें स्ट्रॉबेरी की 14 किस्मों की खेती की गई। लेकिन उसमें केवल दो किस्में,नाबिला और कामारोसा में सफलता मिली है। इतनी बड़ी सफलता देख कृषि वैज्ञानिक भी दंग रह गए हैं। इनसे 50 से 70 ग्राम तक फल उत्पादन होने से कृषि वैज्ञानिक भारी उत्साहित हैं। आमतौर पर प्रदेश में जो भी बाहर से स्ट्राबेरी आती है , उसका वजन लगभग 20 से 30 ग्राम होता है। स्ट्राबेरी को आमतौर पर फल के रूप में खाया जाता है , लेकिन इसे संरक्षित कर जैम , रस , पाई , आइसक्रीम , मिल्क-शेक आदि में इस्तेमाल कर सकते हैं। कृत्रिम स्ट्राबेरी खुशबू भी व्यापक रूप से कई औद्योगिक खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल की जाती है। बाजार में इसकी कीमत 1000 रुपए प्रति किलो है। स्ट्राबेरी के सफल प्रयोग के बाद अब राजनांदगांव में 10 किसानों के यहां स्ट्राबेरी की खेती करेंगे। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस महंगे फल से अच्छी खासी कमाई कर पाएंगे। बाजार में स्ट्राबेरी के फल दूसरे किसी भी फल की तुलना में चार गुना अधिक दाम पर मिलते हैं। आपको बता दें स्ट्राबेरी की खेती केवल ठंडे प्रदेशों , खासकर पहाड़ी इलाकों में ही होती है। छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्र में इसकी खेती कहीं नहीं होती है। हिमाचल प्रदेश और कश्मीर की तरह यहां के ओपन कंडीशन की नर्सरी में स्ट्राबेरी की खेती के लिए कॉलेज के डीन डॉ. आरएन गांगुली और प्रोफेसर डॉ. शिशिर प्रकाश शर्मा ने लगातार प्रयोग किया। इस सफलता के बाद कुलपति डॉ. एसके पाटिल ने मामले की जानकारी कुलाधिपति और राज्यपाल बलरामजी दास टंडन को भी दी।

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