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  2016-07-13

प्रजातंत्र पर हावी अफसरशाही

रायपुर। सोमवार से शुरू हुए मानसून सत्र के दूसरे दिन भी कांग्रेस ने वन अधिकार पट्टे के मुद्दे पर विधानसभा में जमकर बवाल किया। नियम 139 के तहत कांग्रेसी विधायक लखेश्वर बघेल ने आदिवासियों को वन अधिकार पट्टे से वंचित करने का मामला उठाया। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल ने वन अधिकार पट्टा बांटने में अनियमितता का आरोप लगाते हुए वन विभाग और आदिम जाति विकास मंत्री को सदन में घेरा। बघेल ने कहा कि जब वन विभाग के अफसरों के यहां ईओडब्लू का छापा पड़ता है तो अफसरों को बचाने के लिए वन मंत्री तत्काल मुख्यमंत्री के पास पहुंच जाते हैं, लेकिन जब वन विभाग के अफसर आदिवासियों को उनके मकान से बेदखल कर रहे हैं तो आदिवासी मंत्री मौन हैं। बघेल ने मंगलवार को अफसरों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सीएस स्तर के अफसर तक को एक्ट समझ में नहीं आ रहा है। ऐसे में क्रियान्वयन सही कैसे हो सकता है। कांग्रेस के हमलों के जवाब में आदिम जाति मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वन अधिकार पट्टे लगातार बांटे जा रहे हैं। जो भी पात्र हैं उनको पट्टा दिया जाएगा। 431 वन ग्राम को राजस्व बनाया गया। 60 फीसदी आवेदन निरस्त करने के विपक्ष के आरोपों के जवाब में मंत्री ने कहा कि अपात्र लोगों ने भी आवेदन किया था जिसके कारण आवेदन निरस्त किया गया। उन्होंने कहा कि पट्टा बांटने में 6 माह पहले छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर था अभी दूसरे नंबर पर है। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया और नारे लगाते हुए बहिर्गमन किया। भाटापारा विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि आदिवासियों के लिए अलग मंत्रालय बनाने का काम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के समय में हुआ। जो कानून 2005 में बना वह भी एनडीए शासन की पहल पर बना। आजादी के बाद से कांग्रेस ने इस संबंध में क्या किया। 8 लाख 60 हजार आवेदनों में से यदि 3 लाख 40 हजार पट्टे बांटे गए तो यह सरकार की उपलब्धि है। तीन बार जनता का आशीर्वाद मिला। चौथी बार भी मिलेगा। सिंहदेव ने कहा कि सारी गड़बड़ी इसलिए है क्योंकि वन विभाग अपना अधिकार छोड़ना नहीं चाहता है। यूपीए सरकार ने कानून बनाकर आदिवासियों को वन अधिकार पट्टा देने का प्रयास किया। इसका क्रियान्वयन कितना हुआ। काबिज क्षेत्र के अनुसार पट्टा दिया गया क्या? 20 हजार में से दो सौ गांवों को भी वन संपदा के प्रबंधन का अधिकार नहीं दिया गया, यह बड़ा सवाल है। विपक्ष पर राजनीति करने के सत्ता पक्ष के आरोप पर सिंहदेव ने कहा कि यदि आप इसे राजनीति से प्रेरित कहेंगे तो फिर सदन में बात रखने का औचित्य नहीं रह जाएगा। कांग्रेस के हमलों ने सरकार को परेशान कर दिया है। भाजपा विधायक दल की बैठक में भी कांग्रेसी हमले की चर्चा रही। स्वयं मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इन हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सदन के अंदर और बाहर रोज माहौल बना रही है। महीने में 27 दिन पीसी लेकर मुद्दे उठा रही है। भले ही मुद्दों में दम नहीं है, लेकिन कांग्रेस लगातार मुद्दे उठा रही है और हम सही होते हुए भी अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। दूसरी तरफ संसदीय सचिव अजय चंद्राकर ने भी सदन के अंदर विधायकों के परफार्मेंस पर सवाल उठाया। कुछ विधायक निश्चित रूप से अच्छा बोलते हैं, लेकिन कुछ तो बात भी नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों को सदन के अंदर प्रभावी ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। कांग्रेस लगातार संदेश देने का काम कर रही है।

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