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  2017-03-08

छत्तीसगढ़ की 'मसीहा' - मिनी माता

OnlineCG न्यूज़ | भेद-भाव तथा छुआ-छूत भारतवर्ष में एक बीमारी की तरह फैला हुआ है। इस बीमारी को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ में मसीहा के रूप में अवतरित हुईं थी मिनी माता। मिनी माता का जन्म समाज सुधार के लिए ही हुआ था। एक ऐसी मसीहा जिन्होंने अपने स्वार्थ को छोड़कर पूरा जीवन समाज हित में लगा दिया। मिनी माता के विषय में प्रसिद्ध है कि वे इतनी उदार थी कि यदि कोई ठण्ड में सिकुड़ रहा होता था तो वो उसको कम्बल ओढा देती थीं। एक बार उनहोंने अपना कम्बल दूसरे को ओढ़ा करखुद जाड़े में ठिठुरती रही। वे कभी भी किसी की सहायता करने में पीछे नहीं रहती थीं। खुले मन से सबका स्वागत करतीं तथा समस्या का हल निकालती थीं। तो आइए जानते हैं मिनी माता से जुड़ी 10 अनोखी बातें-

  • मिनी माता का वास्तविक नाम मीनाक्षी देवी था।
  • उनकी माता का नाम देवमती था।
  • उन्होंने सन् 1920 में स्वदेशी आंदोलन में भाग लिया।
  • गुरु गद्दीनसीन अगमदास जी गुरु गोसाई से मीनाक्षी देवी ने शादी रचाई और इसके पश्चात वे मिनी माता कहलाईं।
  • सन् 1951 में मिनी माता के पति का देहान्त हो गया।
  • वे 1952 में सांसद बनी।
  • नारी शिक्षा के लिए मिनी माता ने आजीवन काम किया। उन्होंने लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रबंध किया।
  • छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक मंडल की वे अध्यक्ष रहीं।
  • साथ ही वें भिलाई स्थित छत्तीसगढ़ कल्याण मज़दूर संगठन की संस्थापक एवं अध्यक्ष रहीं।
  • सन् 1972 में एक हवाई दुर्घटना में उनका देहांत हो गया।

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