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  2017-08-04

हाईकोर्ट ने मो. अकबर की याचिका को माना लीडिंग याचिका जानिए अब क्या होगा आगे?

OnlineCG बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में 11 संसदीय सचिवों की अवैधानिक नियुक्ति के मामले में लगी दो अलग-अलग याचिकाओं में से बिलासपुर हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री मो. अकबर की याचिका को लीडिंग याचिका मानते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपने इस फैसले में उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री मो. अकबर की याचिका क्रमांक 3057 को लीडिंग याचिका इसलिए माना क्योंकि इसमें सभी संसदीय सचिवों को पार्टी बनाया गया था। वहीं इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने संसदीय सचिवों के कामकाज पर रोक लगाते हुए कहा है कि अगर इनकी नियुक्ति मंत्री पद पर राज्यपाल ने नहीं की है, तो उन्हें काम न करने दिया जाए। आपको बता दें कि ये रोक तब लागू रहेगी जब तक कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर अंतिम फैसला न आ जाए। वहीं याचिकाकर्ता मोहम्मद अकबर ने कोर्ट से मांग की थी कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला न आ जाए तब तक प्रदेश के 11 संसदीय सचिवों को वेतन, भत्तों, गाड़ियों और दूसरी अन्य सुविधाओं के लाभ से वंचित रखा जाए। आपको बता दें कि इस मामले में अंतिम फैसला 23 अगस्त को आना है, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने असम के मामले में फैसला दे दिया है कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकारों को नहीं है। वहीं इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता मो.अकबर का कहना है कि छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिवों के लिए अब तक स्वेच्छानुदान, वेतन-भत्ता, वाहन, आवास, स्टॉफ में व्यय की गई 34 करोड़ 10 लाख रूपए की वसूली के मांग की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसदीय सचिवों को दी गई सुविधाओं के तहत करोड़ों रूपए की राशि का व्यय किया है। अब जब संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर ही सवाल उठ रहा है, तो ऐसे में खर्च की गई राशि की वसूली होनी चाहिए।

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